✍️ रवि भौम सब क्रूर है सौम्य शेष सब चार ।
कार्य करो सब सोच के वार स्वभाव विचार ।।
✍️ रवि ,मंगल,शनि ये तीनो क्रूर वार कहे जाते है । सोम,बुध ,गुरु ,शुक्र ये चारों सौम्य वार कहे जाते है।
✍️ अश्वनी,भरणी, कृतिका,चौथा रोहिणी जान।
मृग-पुनर्वसु,पुष्य,अरु,श्लेष मघा पहचान ।।
पूर्व उत्तराफाल्गुनी,हस्त चित्रा की शान।
स्वाति ,विशाखा सोलहवाँ अनुराधा की जान ।।
ज्येष्ठा मूल तो मूल है पूर्व उतरा षाढ़ ।
श्रवण,धनिष्ठा,शतभिष,इनको मन मे धार ।।
भाद्रपद भी दो सगे,पूर्व उत्तर ओर ।
रेवती तो सताईसवां,रहे अंत के छोर ।।
कार्य करो सब सोच के वार स्वभाव विचार ।।
✍️ रवि ,मंगल,शनि ये तीनो क्रूर वार कहे जाते है । सोम,बुध ,गुरु ,शुक्र ये चारों सौम्य वार कहे जाते है।
✍️ अश्वनी,भरणी, कृतिका,चौथा रोहिणी जान।
मृग-पुनर्वसु,पुष्य,अरु,श्लेष मघा पहचान ।।
पूर्व उत्तराफाल्गुनी,हस्त चित्रा की शान।
स्वाति ,विशाखा सोलहवाँ अनुराधा की जान ।।
ज्येष्ठा मूल तो मूल है पूर्व उतरा षाढ़ ।
श्रवण,धनिष्ठा,शतभिष,इनको मन मे धार ।।
भाद्रपद भी दो सगे,पूर्व उत्तर ओर ।
रेवती तो सताईसवां,रहे अंत के छोर ।।

👍👍👍
ReplyDeleteधन्यवाद कौशिक साहब
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