सोलह तिथि सत वार अरु नखत सताइश मान ।
बारह राशि नव ग्रह इनको करू प्रणाम ।।
इनके मिलने से कभी बनते योग कुयोग ।
जिसके कारण जीव सब करते उनका भोग ।।
अमावस्या से पूर्णिमा तक १६ तिथि, रवि से शनि तक ७ वार ,अश्वनी से रेवती तक २७ नक्षत्र ,मेष से मीन तक १२ राशि,सूर्य से केतु तक ९ ग्रह इस प्रकार से ग्रह,तिथि,वार,नक्षत्र इनके संयोग से योग तथा कुयोग बनते है तथा प्राणी इनके अनुसार सुख दुख भोगते है ।।
मुकेश वत्स
मुनक करनाल
बारह राशि नव ग्रह इनको करू प्रणाम ।।
इनके मिलने से कभी बनते योग कुयोग ।
जिसके कारण जीव सब करते उनका भोग ।।
अमावस्या से पूर्णिमा तक १६ तिथि, रवि से शनि तक ७ वार ,अश्वनी से रेवती तक २७ नक्षत्र ,मेष से मीन तक १२ राशि,सूर्य से केतु तक ९ ग्रह इस प्रकार से ग्रह,तिथि,वार,नक्षत्र इनके संयोग से योग तथा कुयोग बनते है तथा प्राणी इनके अनुसार सुख दुख भोगते है ।।
मुकेश वत्स
मुनक करनाल

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