।। अथ नवांश फलम ।।
राशि के प्रथम नवांश में जिसका जन्म हो वह नम्र ,धर्मात्मा ,सत्य वादी ,दृढ संकल्पी ,और विद्याभ्यास में लगा रहने वाला होता है ।
जिसका जन्म द्वितीय नवांश में हो वह धन भोगी ,संग्राम में हरने वाला एवं वेश्यागामी होता है ।
तृतीयनवांश में उत्पन्न बालक स्त्री के वश में रहने वाला ,संतान हीन ,मायावी ,निस्तेज किन्तु युद्द में निपुण होता है ।
चतुर्थ नवांश में जन्मा जातक स्त्रियों से संपर्क बनाने वाला ,रूपवान ,लोकमान्य ,जलप्रेमी ,धनवान ,राजा का सेवक एवं मंत्री होता है ।
पांचवे नवांश में जन्में बालक के अधिक मित्र वाला ,नेता ,बन्धु तथा अत्यधिक प्रतिष्ठा वाला होता है ।
शत्रु का नाशक ,वीर घनिष्ठ मित्रों वाला और मंडलेश्वर हो तो जातक का जन्म छ्टे नवांश में जाने ।
सप्तम नवांश में जन्म ले तो उसकी आज्ञा सर्वत्र मानी होती है और वह राजा या कुशल सेनापति होता है ।
अष्टम नवांश में पैदा होने वाला जातक उदार ,सर्वत्र विख्यात ,धन-धान्य को व्यय करने में न हिचकने वाला ,किन्तु दुष्ट जनो के द्वारा सदा कष्ट झेलते रहने से स्वभाव क्रोधी होता है ।
नवम नवांश में जन्म लेने से जातक दीर्घायु ,प्रशन्नचित ,विद्याभ्यास करने वाला ,सर्वदा सुखी ,बुद्धिमान,,धर्मात्मा ,लोक में मान्य होता है ।
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