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कुज [मंगली ]दोष -
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1.जन्म कुंडली में 1,4,7,8,12वें भाव में मंगल या अन्य क्रूर ग्रह हो ।
2.चन्द्र कुंडली में 1,4,7,8,12वें भाव में मंगल या अन्य क्रूर ग्रह हो । । 3.शुक्र कुंडली में 1,4,7,8,12, वें भाव में मंगल या अन्य क्रूर ग्रह हो ।
कुज दोष बनाने वाला ग्रह अस्त ,नीचस्थ या शत्रु राशिस्थ हो तो कुज दोष का फल अधिक माना गया है ।कुजदोष दाम्पत्य के लिए अच्छा नहीं माना जाता ।
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कुजदोष के सामान्य कुछ परिहार
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1.कुज दोष बनाने वाला ग्रह उच्चस्थ ,स्वराशिस्थ ,स्वनवांश में हो, मित्र राशि में हो ,उच्च नवांश या मित्र नवांश में हो ।
2.कुजदोष बनाने वाले ग्रह पर बृहस्पति की पूर्ण दृष्टी हो ।
3.वर -कन्या दोनों की कुंडलियो में कुजदोष हो तो दोनों के कुज दोष समाप्त
हो जाते है ।
ध्यान रहे ,कुजदोष वाले वर - कन्या दोनों की कुंडलियो में परिहार मिलने पर कुजदोष का कुफल समाप्त हो जाता है । दोनों की कुंडलियो में से किसी
एक की कुंडली में ही कुजदोष परिहार हो तो कुजदोष का कुप्रभाव रहता है ।
---------------------जय श्री राम -----------------------
Pt. Mukesh Vats
Pt. Mukesh Vats
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